वेनिस फेस्टिवल में भारतीय सफलता
भारतीय सिनेमा के लिए यह साल ऐतिहासिक बन गया है। पश्चिम बंगाल से आने वाली फिल्मकार Anuparna Roy ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल के प्रतिष्ठित Orizzonti सेक्शन में Best Director का पुरस्कार जीता। उनकी फिल्म Songs of Forgotten Trees न केवल दर्शकों बल्कि समीक्षकों को भी गहराई से प्रभावित करने में सफल रही। यह पहली बार था जब भारत की किसी महिला निर्देशक को इस सेक्शन में सम्मान मिला। इस उपलब्धि ने भारतीय फिल्म उद्योग को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाई।
फिल्मों की ओर सफर
Anuparna Roy का करियर फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से तयशुदा नहीं था। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आईटी सेक्टर में नौकरी की। कुछ साल तक कॉर्पोरेट दुनिया में रहने के बाद उन्होंने अचानक कैमरा और कहानी की ओर रुख किया। उनके परिवार को यह फैसला पहले अजीब लगा, क्योंकि फिल्ममेकिंग न तो उनके परिवार का पेशा था और न ही उन्होंने इसे पहले कभी गंभीरता से अपनाया था। लेकिन धीरे-धीरे उनकी लगन और लगातार मेहनत ने यह साबित कर दिया कि वे फिल्मी दुनिया में अपनी अलग जगह बनाने के लिए तैयार हैं।
Songs of Forgotten Trees – कहानी और संवेदनाएँ
Songs of Forgotten Trees दो महिलाओं के रिश्ते, स्मृतियों और समाज में पहचान की जद्दोजहद पर केंद्रित है। फिल्म का नैरेटिव बेहद संजीदा और धीमे अंदाज़ में आगे बढ़ता है। Roy ने इस कहानी के ज़रिए न केवल जेंडर और पहचान जैसे विषयों पर प्रकाश डाला बल्कि ग्रामीण परिवेश की झलक और प्रकृति के साथ मानवीय जुड़ाव को भी बखूबी दर्शाया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों को एक अलग ही अनुभव कराते हैं।
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पुरस्कार के पल
वेनिस में जब Anuparna Roy को Best Director के पुरस्कार के लिए बुलाया गया, तो हॉल तालियों से गूंज उठा। उनके चेहरे पर गर्व और भावनाओं का मिश्रण साफ नजर आ रहा था। उन्होंने अपने भाषण में कहा—“यह जीत केवल मेरी नहीं, बल्कि उन सभी आवाज़ों की है जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। सिनेमा हमारे समाज का आईना है और मुझे खुशी है कि मेरी कहानी वहां तक पहुंची जहां इसे सुना गया।”
विवाद कैसे खड़ा हुआ
पुरस्कार लेते समय Anuparna Roy ने अपने भाषण में कहा कि हर बच्चे को आज़ादी और सुरक्षित भविष्य का अधिकार है, चाहे वह कहीं भी जन्मा हो। उन्होंने विशेष रूप से फ़िलिस्तीन का उल्लेख किया। इस बयान के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनकी बात को मानवता से जोड़कर सही ठहराया, जबकि कईयों ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।
माता-पिता का समर्थन
विवाद के बाद Anuparna Roy के माता-पिता ने मीडिया से बात की। उनका कहना था कि उनकी बेटी ने केवल बच्चों के अधिकार की बात कही थी, राजनीति करने का उसका कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा—“वह सिर्फ इंसानियत की बात कर रही थी। उसे गलत तरीके से समझा जा रहा है। हमें इस विवाद से गहरी चोट पहुंची है, लेकिन हमें यकीन है कि सच सामने आएगा।” परिवार ने यह भी बताया कि जीत के बाद गांव में जश्न का माहौल है और लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
फिल्म इंडस्ट्री और नेताओं की प्रतिक्रिया
Anuparna Roy की जीत पर बॉलीवुड और भारतीय फिल्म जगत ने खुलकर बधाई दी। कई वरिष्ठ निर्देशकों ने इसे “नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा” बताया। Priyanka Chopra, Vidya Balan और कई अन्य अभिनेत्रियों ने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट कर कहा कि यह जीत बंगाल की मिट्टी और भारतीय प्रतिभा के लिए गर्व का क्षण है।
भारतीय सिनेमा में महिला निर्देशकों की पहचान
यह उपलब्धि सिर्फ Anuparna Roy की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय महिला फिल्मकारों की शक्ति का भी प्रतीक है। भारत में लंबे समय तक निर्देशन पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। लेकिन पिछले एक दशक में कई महिला निर्देशकों ने अपनी फिल्मों से यह साबित किया है कि उनकी दृष्टि भी उतनी ही दमदार और वैश्विक स्तर की है। Roy की यह जीत उसी कड़ी में एक बड़ा कदम है।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति
वेनिस, कान और बर्लिन जैसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भारतीय फिल्मों का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ रहा है। Songs of Forgotten Trees ने यह साबित किया कि भारतीय फिल्में सिर्फ बॉक्स ऑफिस मसाला या नृत्य-गीत तक सीमित नहीं हैं। वे संवेदनशील और वैश्विक विषयों को भी बड़ी गहराई से प्रस्तुत कर सकती हैं।
विवाद का असर
हालांकि यह सच है कि Anuparna Roy के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बंटा हुआ माहौल है, लेकिन इसका असर उनकी उपलब्धि को कम नहीं कर सकता। कई फिल्म समीक्षक मानते हैं कि कला और राजनीति को अलग रखना जरूरी है। Roy की फिल्म अपने आप में इतनी मजबूत है कि इसे किसी विवाद की ज़रूरत नहीं।
आगे की राह
Anuparna Roy अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा चुकी हैं। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, उन्हें पहले ही कुछ ग्लोबल प्रोडक्शन हाउस से ऑफर मिलने लगे हैं। वह फिलहाल भारत लौटकर अपने अगले प्रोजेक्ट की स्क्रिप्ट पर काम कर रही हैं। उन्होंने मीडिया से कहा—“मेरे लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम है। मैं चाहती हूं कि मेरी कहानियां लोगों को सोचने पर मजबूर करें।”
Anuparna Roy की जीत भारतीय सिनेमा के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। Songs of Forgotten Trees ने न सिर्फ वेनिस फिल्म फेस्टिवल में भारत का नाम रोशन किया, बल्कि एक नई सोच और दिशा भी दी। विवादों के बावजूद उनका संदेश साफ है—कला को मानवता और सकारात्मक बदलाव के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। यह जीत इस बात का सबूत है कि भारतीय प्रतिभा अगर सही अवसर पाए, तो वैश्विक मंच पर किसी से पीछे नहीं।


