Songs of Forgotten Trees: वेनिस फिल्म फेस्टिवल में भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक उपलब्धि

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Songs of Forgotten Trees: भारतीय सिनेमा की नई पहचान

भारतीय फिल्म जगत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Anuparna Roy निर्देशित फिल्म Songs of Forgotten Trees ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल में Best Director का अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया। इस फिल्म ने न केवल भारतीय दर्शकों को गौरवान्वित किया बल्कि दुनिया भर में भारतीय सिनेमा की नई दिशा भी दिखाई।

कहानी का सार

यह कहानी मुंबई जैसे व्यस्त शहर में रहने वाली दो महिलाओं की है। वे अलग-अलग परिवारों और पृष्ठभूमियों से आती हैं, लेकिन समय के साथ, वे दोस्त बन जाती हैं और एक ही घर में रहते हुए एक-दूसरे की परवाह करने लगती हैं। शहर का शोर, अकेलापन और रोज़मर्रा की चुनौतियाँ इनकी जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन उनके बीच की दोस्ती और समझदारी इन हालात को आसान बनाती है। Songs of Forgotten Trees शहरी जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में पेश करती है।

 

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निर्देशन और तकनीकी पहलू

अनुपर्णा रॉय (Anuparna Roy ) ने इस फिल्म का निर्देशन बेहतरीन ढंग से किया है। उन्होंने कहानी कहने के लिए ज़्यादा बातें करने की बजाय भावनाओं और शांत पलों का इस्तेमाल किया है। फिल्म को जिस तरह से फिल्माया गया है, वह लाजवाब है, जिससे हर दृश्य एक खूबसूरत तस्वीर जैसा लगता है। पृष्ठभूमि में संगीत बहुत ही दमदार है और हमें किरदारों की भावनाओं को महसूस करने में मदद करता है। फिल्म को जिस तरह से तैयार किया गया है, वह भी बहुत अच्छा है, इसलिए कहानी सहजता से आगे बढ़ती है और अंत तक सबकी दिलचस्पी बनाए रखती है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान

“सॉन्ग्स ऑफ़ फ़ॉरगॉटन ट्रीज़” (Songs of Forgotten Trees ) को वेनिस महोत्सव के एक विशेष भाग, “ओरिज़ोंटी”(Orizzonti) में प्रदर्शित करने के लिए चुना गया था। यह वह जगह है जहाँ विभिन्न देशों के फिल्म निर्माता अपनी कहानियाँ सभी को दिखाने के लिए अपनी फ़िल्में साझा करते हैं। Anuparna Roy ने इस सेक्शन में Best Director का अवॉर्ड जीतकर भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय सिनेमा केवल व्यावसायिक फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतनी ही ताकत से उठा सकता है।

पारिवारिक सफर और संघर्ष

Anuparna Roy का सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आईटी सेक्टर से की थी, लेकिन सिनेमा के प्रति जुनून ने उन्हें एक अलग राह पर ला खड़ा किया। परिवार को पहले उनकी इस राह पर संदेह था, लेकिन आज वही माता-पिता उनकी सफलता पर गर्व कर रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का नतीजा है, बल्कि उनके परिवार और दोस्तों के समर्थन की भी मिसाल है।

विवाद और प्रतिक्रिया

अनुपर्णा रॉय(Anuparna Roy) को जब पुरस्कार मिला, तो उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को शांति और आज़ादी मिलनी चाहिए। उन्होंने फ़िलिस्तीन के बारे में भी बात की, जिस पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी राय साझा करना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने उनके बयान को संवेदनशील और मानवीय करार दिया, जबकि कुछ ने इसे राजनीति से जोड़ दिया। इस विवाद पर उनके माता-पिता ने साफ किया कि बेटी का इरादा केवल बच्चों के अधिकारों की बात करना था, न कि राजनीति में प्रवेश करना।

समीक्षकों की राय

फ़िल्में देखने और उनके बारे में बात करने वाले लोगों का कहना है कि सॉन्ग्स ऑफ़ फ़ॉरगॉटन ट्रीज़ (Songs of Forgotten Trees ) बहुत ख़ास है और आपको कई अलग-अलग तरह की भावनाएँ महसूस कराती है। फ़िल्म जिस तरह दिखती है और जिस तरह से बनाई गई है, वह दुनिया भर की फ़िल्मों की तरह ही बेहतरीन है। कुछ आलोचकों का मानना ​​है कि फ़िल्म थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ती है, लेकिन यह आपको जो एहसास दिलाती है, वह इतना गहरा है कि आप इसे लंबे समय तक याद रखेंगे।

बॉलीवुड और समाज की प्रतिक्रिया

कई बॉलीवुड हस्तियों ने इस जीत पर Anuparna Roy को बधाई दी। Priyanka Chopra समेत कई अभिनेत्रियों ने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ की और इसे भारतीय सिनेमा के लिए गौरव का क्षण बताया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट कर कहा कि यह उपलब्धि राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का विषय है।

महिला निर्देशकों के लिए प्रेरणा

यह जीत भारतीय महिला निर्देशकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। लंबे समय तक निर्देशन को पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन अब महिला फिल्मकार भी अपने दमदार काम से पहचान बना रही हैं। Songs of Forgotten Trees ने यह साबित कर दिया कि महिला दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतनी ही मजबूत और प्रभावी हो सकता है।

आगे की राह

Anuparna Roy अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। खबर है कि उन्हें पहले ही कई ग्लोबल प्रोडक्शन हाउस से ऑफर मिल चुके हैं। वे भारत लौटकर अपने अगले प्रोजेक्ट की स्क्रिप्ट पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि वे सिनेमा को संवाद का माध्यम मानती हैं और उनकी कहानियाँ हमेशा समाज से जुड़ी रहेंगी।

निष्कर्ष

Songs of Forgotten Trees भारतीय सिनेमा की नई सोच और दिशा का प्रतीक है। यह फिल्म दर्शाती है कि भारतीय फिल्मकार अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संवेदनशील और वैश्विक विषयों पर भी गहरी कहानियाँ कह सकते हैं। Anuparna Roy की जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है बल्कि यह पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए गर्व की बात है।

 

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