Tehran Movie Hit or Flop? | तेहरान फिल्म हिट या फ्लॉप, जानिए ओटीटी रिलीज़ के बाद कैसा रहा रिस्पॉन्स

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फिल्म की कहानी 2012 के उस वास्तविक घटनाक्रम से प्रेरित है, जब भारत समेत कई देशों में इज़राइली डिप्लोमैट्स को निशाना बनाया गया था। जॉन अब्राहम ने फिल्म में स्पेशल सेल ऑफिसर राजीव कुमार का किरदार निभाया है, जो आतंकियों को पकड़ने के लिए तेहरान तक जाता है। उनके साथ मानुषी छिल्लर और नीरू बाजवा भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देती हैं। निर्देशन अरुण गोपालन का है, जिन्होंने फिल्म को रियलिस्टिक एक्शन और थ्रिलर अंदाज़ में प्रस्तुत किया।

बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की जानकारी

तेहरान को सीधे ओटीटी पर रिलीज़ किया गया, इसलिए इसके बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। परंतु माना जा रहा है कि प्रोड्यूसर्स ने इसके डिजिटल राइट्स को ऊंची कीमत पर बेचकर लागत निकाल ली है। इस कारण फिल्म की सफलता को पारंपरिक बॉक्स ऑफिस पैमाने से मापना संभव नहीं है।

थिएटर रिलीज़ क्यों नहीं हुई?

फिल्म का विषय ईरान और इज़राइल के विवाद से जुड़ा हुआ है। इतना संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा थिएट्रिकल रिलीज़ के लिए रिस्कभरा हो सकता था। सेंसरशिप और विवाद से बचने के लिए मेकर्स ने सीधे डिजिटल प्रीमियर का विकल्प चुना। यह फैसला सही भी साबित हुआ, क्योंकि फिल्म रिलीज़ होते ही Netflix और Zee5 पर ट्रेंड करने लगी।

द डिप्लोमैट से तुलना

इसी साल जॉन अब्राहम की फिल्म The Diplomat रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म का बजट लगभग ₹20 करोड़ था और इसने वैश्विक स्तर पर ₹53.14 करोड़ कमाए थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट मानी गई थी। वहीं तेहरान की सफलता थिएटर में नहीं बल्कि ओटीटी व्यूअरशिप पर आधारित है।

दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया

फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

  • सकारात्मक पक्ष: जॉन अब्राहम के एक्शन सीक्वेंस, कैमरे का काम और फिल्म का रियलिस्टिक टोन।
  • नकारात्मक पक्ष: कमजोर इमोशनल कनेक्ट और धीमी गति की कहानी।
    फिर भी सोशल मीडिया पर #TehranOnNetflix ट्रेंड करता रहा और बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसे देखा।

हिट या फ्लॉप का फैसला

अगर परंपरागत बॉक्स ऑफिस स्केल पर देखें तो तेहरान को हिट या फ्लॉप कैटेगरी में रखना मुश्किल है, क्योंकि थिएटर कलेक्शन का कोई डेटा मौजूद नहीं है। लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसे अच्छी व्यूअरशिप मिल रही है और डिजिटल राइट्स से प्रोड्यूसर्स को फायदा हुआ है। इस हिसाब से कहा जा सकता है कि तेहरान को ओटीटी पर सफल कहा जा सकता है।

निष्कर्ष

तेहरान एक अलग तरह की फिल्म है, जिसने भारतीय सिनेमा में जासूसी थ्रिलर को नया रूप देने की कोशिश की। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी ताकत नहीं दिखा पाई क्योंकि इसका थिएट्रिकल रन हुआ ही नहीं, लेकिन ओटीटी पर इसे दर्शकों ने पसंद किया। कुल मिलाकर, यह फिल्म जॉन अब्राहम के करियर में एक अनोखा प्रयोग है जिसे दर्शकों ने डिजिटल माध्यम पर स्वीकारा।

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