Tehran movie review (तेहरान मूवी रिव्यू )

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तेहरान मूवी(Tehran movie) रेटिंग: ⭐⭐½ (2.5/10)

कलाकार: जॉन अब्राहम, मानुषी छिल्लर, हादी खंजनपुर, मधुरिमा तुली
निर्देशक: अरुण गोपालन
जॉनर: जासूसी थ्रिलर

कहानी (Synopsis)

फिल्म तेहरान की पृष्ठभूमि साल 2012 में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ी है। दिल्ली में हुए बम धमाके में एक इज़राइली डिप्लोमैट और एक मासूम फूल बेचने वाली बच्ची की मौत हो जाती है। इस वारदात की जिम्मेदारी अफशार होसैनी (हादी खंजनपुर) पर आती है।

स्पेशल सेल ऑफिसर राजीव कुमार उर्फ आरके (जॉन अब्राहम) इस केस को अपने हाथ में लेते हैं। जब इस मामले को RAW को सौंपने का दबाव डाला जाता है, तो राजीव इंकार कर देते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक आतंकवादी हमला नहीं, बल्कि एक मासूम बच्ची की जान का सवाल है। आदेशों की परवाह किए बिना, राजीव अपनी सहयोगी दिव्या राणा (मानुषी छिल्लर) के साथ ईरान तक जाने का फैसला करते हैं ताकि अफशार होसैनी को खत्म किया जा सके।

कहानी और पटकथा

लेखिका बिंदनी कारिया ने वास्तविक घटनाओं से प्रेरित कहानी लिखी है, जो दर्शकों को आकर्षित करती है। पटकथा तेज़ रफ्तार है और ज़्यादातर हिस्सों में बांधे रखती है। डायलॉग्स भी प्राकृतिक और आसान हैं।

हालाँकि, फिल्म में मासूम बच्ची की मौत वाले भावनात्मक पहलू को उतनी गहराई से नहीं दिखाया गया। नतीजतन, राजीव का रिस्क लेकर ईरान जाने का निर्णय पूरी तरह असरदार नहीं लगता। साथ ही कई घटनाएँ हीरो के पक्ष में आसानी से होती दिखती हैं। क्लाइमैक्स साधारण है, लेकिन अंत में दिखाए गए टेक्स्ट थोड़ा असर डालते हैं।

निर्देशन

अरुण गोपालन ने रियलिस्टिक ट्रीटमेंट चुना है, जिससे फिल्म ज़मीन से जुड़ी लगती है। लेकिन भावनात्मक जुड़ाव की कमी के कारण कहानी दिल को छूने में असफल रहती है।

कलाकारों का अभिनय

  • जॉन अब्राहम एक्शन सीन में बेहतरीन हैं और किरदार उन पर फिट बैठता है। लेकिन भावनाएँ दिखाने में वे सीमित नज़र आते हैं।
  • हादी खंजनपुर (अफशार होसैनी) फिल्म के सबसे दमदार अभिनेता साबित होते हैं।
  • मानुषी छिल्लर का रोल छोटा है और संवाद भी बहुत कम दिए गए हैं।
  • अली खान RAW अफसर के किरदार में अच्छे लगे।
  • नीरू बाजवा और मधुरिमा तुली ठीक हैं लेकिन उन्हें ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं मिला।

संगीत और तकनीकी पक्ष

  • फिल्म में सिर्फ एक गाना है “हसरतों के बाज़ार” (ध्रुव घानेकर) जो प्रभावशाली नहीं बन पाया।
  • केतन सोधा का बैकग्राउंड स्कोर तनाव और रोमांच पैदा करने में सफल है।
  • कैमरा वर्क (Ievgen Gubrenko, Andre Menezes) शानदार है और फिल्म को इंटरनेशनल लुक देता है।
  • एक्शन डिज़ाइन (डग कोलमैन, अमृतपाल सिंह) रॉ और रियलिस्टिक है।
  • प्रोडक्शन डिज़ाइन (मेघना गांधी) और कॉस्ट्यूम्स (आयेशा दासगुप्ता) कहानी को असली दुनिया से जोड़ते हैं।
  • एडिटिंग (अक्षरा प्रभाकर) टाइट और स्लिक है।
  • VFX (Redefine) भी अच्छा असर छोड़ता है।

फैसला (Verdict)

कुल मिलाकर तेहरान एक ठीक-ठाक जासूसी ड्रामा है। टेक्निकल पक्ष और एक्शन बेहतरीन हैं, लेकिन इमोशनल कनेक्ट की कमी इसे यादगार फिल्म बनने से रोक देती है।

किसे देखनी चाहिए?
अगर आपको रियलिस्टिक एक्शन और जासूसी कहानियाँ पसंद हैं तो यह फिल्म देखने लायक है। लेकिन मसाला एंटरटेनमेंट चाहने वालों को यह फीकी लग सकती है।

रेटिंग: ⭐⭐½ (2.5/5)

 

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